लेकिन मैं ज़रा भी मुख़िल न हूंगा। वही बेगम साहब---'
रमा ने बात काटकर कहा, 'जी नहीं, वहां मुझे नहीं जाना है।'
दारोग़ा -'तो क्या कोई दूसरा शिकार है? बंगले पर भी आज कुछ कम बहार न रहेगी। वहीं आपके दिल-बहलाव का कुछ सामान हाज़िर हो जायगा।'
रमा ने एकबारगी आंखें लाल करके कहा, 'क्या आप मुझे शोहदा समझते हैं?मैं इतना जलील नहीं हूं।'
दारोग़ा ने कुछ लज्जित होकर कहा, 'अच्छा साहब, गुनाह हुआ, माफ कीजिए। अब कभी ऐसी गुस्ताखी न
लेकिन मैं ज़रा भी मुख़िल न हूंगा। वही बेगम साहब---'
रमा ने बात काटकर कहा, 'जी नहीं, वहां मुझे नहीं जाना है।'
दारोग़ा -'तो क्या कोई दूसरा शिकार है? बंगले पर भी आज कुछ कम बहार न रहेगी। वहीं आपके दिल-बहलाव का कुछ सामान हाज़िर हो जायगा।'
रमा ने एकबारगी आंखें लाल करके कहा, 'क्या आप मुझे शोहदा समझते हैं?मैं इतना जलील नहीं हूं।'
दारोग़ा ने कुछ लज्जित होकर कहा, 'अच्छा साहब, गुनाह हुआ, माफ कीजिए। अब कभी ऐसी गुस्ताखी न