वे भी लज्जा के सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं करते। आग में झुंक जाना, तलवार के सामने खड़े हो जाना, इसकी अपेक्षा कहीं सहज है। लाज की रक्षा ही के लिए बड़े-बडे राज्य मिट गए हैं, रक्त की नदियां बह गई हैं, प्राणों की होली खेल डाली गई है। उसी लाज ने आज रमा के पग भी पीछे हटा दिए।
शायद जेल की सज़ा से वह इतना भयभीत न होता।
पैंतालीस
रमा आधी रात गए सोया, तो नौ बजे दिन तक नींद न खुली ब वह स्वप्न देख रहा था,दिनेश को फांसी हो
वे भी लज्जा के सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं करते। आग में झुंक जाना, तलवार के सामने खड़े हो जाना, इसकी अपेक्षा कहीं सहज है। लाज की रक्षा ही के लिए बड़े-बडे राज्य मिट गए हैं, रक्त की नदियां बह गई हैं, प्राणों की होली खेल डाली गई है। उसी लाज ने आज रमा के पग भी पीछे हटा दिए।
शायद जेल की सज़ा से वह इतना भयभीत न होता।
पैंतालीस
रमा आधी रात गए सोया, तो नौ बजे दिन तक नींद न खुली ब वह स्वप्न देख रहा था,दिनेश को फांसी हो