तुमसे वफा की उम्मीद और क्या हो सकती है!'
ज़ोहरा दिल में ख़ुश होकर अपनी बडी-बडी रतनारी आंखों से उसकी ओर ताकती हुई बोली,हां साहब, हम वफा क्या जानें, आख़िर वेश्या ही तो ठहरीं! बेवफा वेश्या भी कहीं वफादार हो सकती है? '
रमा ने आपत्ति करके पूछा, 'क्या इसमें कोई शक है? '
ज़ोहरा -' 'नहीं, ज़रा भी नहीं ब आप लोग हमारे पास मुहब्बत से लबालब भरे दिल लेकर आते हैं, पर हम उसकी ज़रा भी कद्र नहीं करतीं ब यही बात है न? '
रमानाथ-'बेशक।'
तुमसे वफा की उम्मीद और क्या हो सकती है!'
ज़ोहरा दिल में ख़ुश होकर अपनी बडी-बडी रतनारी आंखों से उसकी ओर ताकती हुई बोली,हां साहब, हम वफा क्या जानें, आख़िर वेश्या ही तो ठहरीं! बेवफा वेश्या भी कहीं वफादार हो सकती है? '
रमा ने आपत्ति करके पूछा, 'क्या इसमें कोई शक है? '
ज़ोहरा -' 'नहीं, ज़रा भी नहीं ब आप लोग हमारे पास मुहब्बत से लबालब भरे दिल लेकर आते हैं, पर हम उसकी ज़रा भी कद्र नहीं करतीं ब यही बात है न? '
रमानाथ-'बेशक।'