चाहिए। कम-से-कम यह तो मालूम हो जाय कि वह घर पर है या नहीं।
दारोग़ा के पास जाकर बोला, 'रात तो आप आपे में न थे।'
दारोग़ा ने ईर्ष्याको छिपाते हुए कहा, 'यह बात न थी। मैं महज़ आपको छेड़ रहा था।'
रमानाथ-'ज़ोहरा रात आई नहीं , ज़रा किसी को भेजकर पता तो लगवाइए, बात क्या है। कहीं नाराज़ तो नहीं हो गई?'
दारोग़ा ने बेदिली से कहा, 'उसे गरज़ होगा खुद आएगी। किसी को भेजने की जरूरत नहीं है।'
रमा ने फिर आग्रह न किया। समझ गया,
चाहिए। कम-से-कम यह तो मालूम हो जाय कि वह घर पर है या नहीं।
दारोग़ा के पास जाकर बोला, 'रात तो आप आपे में न थे।'
दारोग़ा ने ईर्ष्याको छिपाते हुए कहा, 'यह बात न थी। मैं महज़ आपको छेड़ रहा था।'
रमानाथ-'ज़ोहरा रात आई नहीं , ज़रा किसी को भेजकर पता तो लगवाइए, बात क्या है। कहीं नाराज़ तो नहीं हो गई?'
दारोग़ा ने बेदिली से कहा, 'उसे गरज़ होगा खुद आएगी। किसी को भेजने की जरूरत नहीं है।'
रमा ने फिर आग्रह न किया। समझ गया,