मैंने ताज्जुब से पूछा, 'पुलिस के आदमी होकर वह तुम्हें यहां आने की आज़ादी देते हैं?'
जालपा इस प्रश्न के लिए तैयार न मालूम होती थी। कुछ चौंककर बोली, 'वह मुझसे कुछ नहीं कहते---मैंने उनसे यहां आने की बात नहीं कही--वह घर बहुत कम आते हैं। वहीं पुलिस वालों के साथ रहते हैं।'
उन्होंने एक साथ तीन जवाब दिए। फिर भी उन्हें शक हो रहा था कि इनमें से कोई जवाब इत्मीनान के लायक नहीं है। वह कुछ खिसियानी-सी होकर दूसरी तरफ ताकने लगी। मैंने पूछा,
मैंने ताज्जुब से पूछा, 'पुलिस के आदमी होकर वह तुम्हें यहां आने की आज़ादी देते हैं?'
जालपा इस प्रश्न के लिए तैयार न मालूम होती थी। कुछ चौंककर बोली, 'वह मुझसे कुछ नहीं कहते---मैंने उनसे यहां आने की बात नहीं कही--वह घर बहुत कम आते हैं। वहीं पुलिस वालों के साथ रहते हैं।'
उन्होंने एक साथ तीन जवाब दिए। फिर भी उन्हें शक हो रहा था कि इनमें से कोई जवाब इत्मीनान के लायक नहीं है। वह कुछ खिसियानी-सी होकर दूसरी तरफ ताकने लगी। मैंने पूछा,