रमानाथ-'नहीं, मैं खाना खा चुका हूं। बस, जालपा से दो बातें करना चाहता हूं।'
देवीदीन-'वह मानेंगी नहीं, नाहक शमिऊदा होना पड़ेगा। मानने वाली औरत नहीं है।'
रमानाथ-'मुझसे दो-दो बातें करेंगी या मेरी सूरत ही नहीं देखना चाहतीं?ज़रा जाकर पूछ लो।'
देवीदीन-'इसमें पूछना क्या है, दोनों बैठी तो हैं, जाओ। तुम्हारा घर जैसे तब था वैसे अब भी है।'
रमानाथ-'नहीं दादा, उनसे पूछ लो। मैं यों न जाऊंगा।'
देवीदीन ने ऊपर जाकर कहा,'तुमसे कुछ कहना चाहते हैं, बहू!'
रमानाथ-'नहीं, मैं खाना खा चुका हूं। बस, जालपा से दो बातें करना चाहता हूं।'
देवीदीन-'वह मानेंगी नहीं, नाहक शमिऊदा होना पड़ेगा। मानने वाली औरत नहीं है।'
रमानाथ-'मुझसे दो-दो बातें करेंगी या मेरी सूरत ही नहीं देखना चाहतीं?ज़रा जाकर पूछ लो।'
देवीदीन-'इसमें पूछना क्या है, दोनों बैठी तो हैं, जाओ। तुम्हारा घर जैसे तब था वैसे अब भी है।'
रमानाथ-'नहीं दादा, उनसे पूछ लो। मैं यों न जाऊंगा।'
देवीदीन ने ऊपर जाकर कहा,'तुमसे कुछ कहना चाहते हैं, बहू!'