गबन - Gaban




देवीदीन-'मुझे कुछ मालूम हो तब तो बताऊं साहब! यहां आए, अपनी घरवाली से तकरार की और चले गए।'

दारोग़ा -'वह कब इलाहाबाद जा रही हैं?'

देवीदीन-'इलाहाबाद जाने की तो बाबूजी ने कोई बातचीत नहीं की। जब तक हाईकोर्ट का फैसला न हो जायगा, वह यहां से न जाएंगी।'

दारोग़ा -'मुझे तुम्हारी बातों का यकीन नहीं आता।'यह कहते हुए दारोग़ा नीचे की कोठरी में घुस गए और हर एक चीज़ को ग़ौर से देखा। फिर ऊपर चढ़गए। वहां तीन औरतों को देखकर चौंके,


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देवीदीन-'मुझे कुछ मालूम हो तब तो बताऊं साहब! यहां आए, अपनी घरवाली से तकरार की और चले गए।'

दारोग़ा -'वह कब इलाहाबाद जा रही हैं?'

देवीदीन-'इलाहाबाद जाने की तो बाबूजी ने कोई बातचीत नहीं की। जब तक हाईकोर्ट का फैसला न हो जायगा, वह यहां से न जाएंगी।'

दारोग़ा -'मुझे तुम्हारी बातों का यकीन नहीं आता।'यह कहते हुए दारोग़ा नीचे की कोठरी में घुस गए और हर एक चीज़ को ग़ौर से देखा। फिर ऊपर चढ़गए। वहां तीन औरतों को देखकर चौंके,


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