'वह तो मेरे यहां आने के पहले ही चले गए थे। फिर मैं यहीं बैठ गई और जालपा देवी से बात करने लगी।'
'अच्छा, ज़रा मेरे साथ आओ। उनका पता लगाना है।'
ज़ोहरा ने बनावटी कौतूहल से कहा, 'क्या अभी तक बंगले पर नहीं पहुंचे ?'
'ना! न जाने कहां रह गए। '
रास्ते में दारोग़ा ने पूछा, 'जालपा कब तक यहां से जाएगी ?'
ज़ोहरा-'मैंने खूब पट्टी पढ़ाई है। उसके जाने की अब जरूरत नहीं है। शायद रास्ते पर आ जाय। रमानाथ ने बुरी तरह डांटा है। उनकी धमकियों से डर गई है। '
'वह तो मेरे यहां आने के पहले ही चले गए थे। फिर मैं यहीं बैठ गई और जालपा देवी से बात करने लगी।'
'अच्छा, ज़रा मेरे साथ आओ। उनका पता लगाना है।'
ज़ोहरा ने बनावटी कौतूहल से कहा, 'क्या अभी तक बंगले पर नहीं पहुंचे ?'
'ना! न जाने कहां रह गए। '
रास्ते में दारोग़ा ने पूछा, 'जालपा कब तक यहां से जाएगी ?'
ज़ोहरा-'मैंने खूब पट्टी पढ़ाई है। उसके जाने की अब जरूरत नहीं है। शायद रास्ते पर आ जाय। रमानाथ ने बुरी तरह डांटा है। उनकी धमकियों से डर गई है। '