गबन - Gaban

को गाड़ी से खोलकर खूंटे से बांधा दिया और दयानाथ से बोला,'अभी भैया नहीं लौटे?'

दयानाथ ने डांठों को समेटते हुए कहा, 'अभी तो नहीं लौटे। मुझे तो अब इनके अच्छे होने की आशा नहीं है। ज़माने का उधार है। कितने सुख से रहती थीं, गाड़ी थी, बंगला था, दरजनों नौकर थे। अब यह हाल है। सामान सब मौजूद है, वकील साहब ने अच्छी संपत्ति छोड़ी था, मगर भाई-भतीजों ने हड़प ली। देवीदीन-' 'भैया कहते थे, अदालत करतीं तो सब मिल जाता, पर कहती हैं, मैं


1182 of 1203

को गाड़ी से खोलकर खूंटे से बांधा दिया और दयानाथ से बोला,'अभी भैया नहीं लौटे?'

दयानाथ ने डांठों को समेटते हुए कहा, 'अभी तो नहीं लौटे। मुझे तो अब इनके अच्छे होने की आशा नहीं है। ज़माने का उधार है। कितने सुख से रहती थीं, गाड़ी थी, बंगला था, दरजनों नौकर थे। अब यह हाल है। सामान सब मौजूद है, वकील साहब ने अच्छी संपत्ति छोड़ी था, मगर भाई-भतीजों ने हड़प ली। देवीदीन-' 'भैया कहते थे, अदालत करतीं तो सब मिल जाता, पर कहती हैं, मैं


1182 of 1203