गबन - Gaban

जिसकी उसने कभी कल्पना भी न की थी। इस मौके में उसके वंचित ह्रदय ने पति-प्रेम और पुत्र-स्नेह दोनों

ही पा लिया। देवीदीन ने रतन के चेहरे की ओर सचिंत नजरों से देखा, तब उसकी नाड़ी

हाथ में लेकर पूछा,'कितनी देर से नहीं बोलीं ?'

जालपा ने आंखें पोंछकर कहा, 'अभी तो बोलती थीं। एकाएक आंखें ऊपर चढ़गई और बेहोश हो गई। वैद्य जी को लेकर अभी तक नहीं आए?'

देवीदीन ने कहा, 'इनकी दवा वैद्य के पास नहीं है। 'यह कहकर उसने थोड़ी-सी राख ली,


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जिसकी उसने कभी कल्पना भी न की थी। इस मौके में उसके वंचित ह्रदय ने पति-प्रेम और पुत्र-स्नेह दोनों

ही पा लिया। देवीदीन ने रतन के चेहरे की ओर सचिंत नजरों से देखा, तब उसकी नाड़ी

हाथ में लेकर पूछा,'कितनी देर से नहीं बोलीं ?'

जालपा ने आंखें पोंछकर कहा, 'अभी तो बोलती थीं। एकाएक आंखें ऊपर चढ़गई और बेहोश हो गई। वैद्य जी को लेकर अभी तक नहीं आए?'

देवीदीन ने कहा, 'इनकी दवा वैद्य के पास नहीं है। 'यह कहकर उसने थोड़ी-सी राख ली,


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