रमानाथ-'नहीं, अभी तो नहीं हैं।'
देवीदीन-'छोटे भाई भी होंगे?'
रमा चकित होकर बोला,'हां दादा, ठीक कहते हो तुमने कैसे जाना?'
देवीदीन फिर ठटठा मारकर बोला,यह सब कर्मों का खेल है। ससुराल धनी होगी, क्यों? '
रमानाथ-'हां दादा, है तो।'
देवीदीन-'मगर हिम्मत न होगी।'
रमानाथ-'बहुत ठीक कहते हो, दादा। बडे कम-हिम्मत हैं। जब से विवाह हुआ अपनी लडकी तक को तो बुलाया नहीं।'
देवीदीन--'समझ गया भैया, यही दुनिया का दस्तूर है। बेटे के लिए कहो चोरी करें,
रमानाथ-'नहीं, अभी तो नहीं हैं।'
देवीदीन-'छोटे भाई भी होंगे?'
रमा चकित होकर बोला,'हां दादा, ठीक कहते हो तुमने कैसे जाना?'
देवीदीन फिर ठटठा मारकर बोला,यह सब कर्मों का खेल है। ससुराल धनी होगी, क्यों? '
रमानाथ-'हां दादा, है तो।'
देवीदीन-'मगर हिम्मत न होगी।'
रमानाथ-'बहुत ठीक कहते हो, दादा। बडे कम-हिम्मत हैं। जब से विवाह हुआ अपनी लडकी तक को तो बुलाया नहीं।'
देवीदीन--'समझ गया भैया, यही दुनिया का दस्तूर है। बेटे के लिए कहो चोरी करें,