सारा समाचार मालूम हो जाता और मुझे यह विश्वास है कि वह इस मुलाकात की किसी से चर्चा भी न करती। मेरी पत्नी से भी न कहती, लेकिन मेरी हिम्मत ही न पड़ी। अब अगर मिलना भी चाहूं, तो नहीं मिल सकता उसका पता-ठिकाना कुछ भी तो नहीं मालूम । देवीदीन-'तो फिर उसी को क्यों नहीं एक चिट्ठी लिखते?'
रमानाथ-'चिटठी तो मुझसे न लिखी जाएगी।'
देवीदीन-'तो कब तक चिट्ठी न लिखोगे?'
रमानाथ-'देखा चाहिए।'
देवीदीन-'पुलिस तुम्हारी टोह में होगी।'
सारा समाचार मालूम हो जाता और मुझे यह विश्वास है कि वह इस मुलाकात की किसी से चर्चा भी न करती। मेरी पत्नी से भी न कहती, लेकिन मेरी हिम्मत ही न पड़ी। अब अगर मिलना भी चाहूं, तो नहीं मिल सकता उसका पता-ठिकाना कुछ भी तो नहीं मालूम । देवीदीन-'तो फिर उसी को क्यों नहीं एक चिट्ठी लिखते?'
रमानाथ-'चिटठी तो मुझसे न लिखी जाएगी।'
देवीदीन-'तो कब तक चिट्ठी न लिखोगे?'
रमानाथ-'देखा चाहिए।'
देवीदीन-'पुलिस तुम्हारी टोह में होगी।'