वह भूलकर भी यह न समझे कि मेरी अपकीर्ति हो रही है।
देवीदीन ने पूछा, 'क्या सोच रहे हो? चलोगे न?'
रमा ने दबी जबान से कहा, 'तुम्हारी इतनी दया है, तो चलूंगा, मगर पहले तुम्हें मेरे घर जाकर पूरा-पूरा समाचार लाना पड़ेगा। अगर मेरा मन न भरा, तो मैं लौट आऊंगा।'
देवीदीन ने दृढ़ता से कहा, 'मंजूर।'
रमा ने संकोच से आंखें नीची करके कहा, 'एक बात और है?'
देवीदीन-' 'क्या बात है? कहो।'
'मुझे कुछ कपड़े बनवाने पड़ेंगे।'
'बन जायेंगे।'
वह भूलकर भी यह न समझे कि मेरी अपकीर्ति हो रही है।
देवीदीन ने पूछा, 'क्या सोच रहे हो? चलोगे न?'
रमा ने दबी जबान से कहा, 'तुम्हारी इतनी दया है, तो चलूंगा, मगर पहले तुम्हें मेरे घर जाकर पूरा-पूरा समाचार लाना पड़ेगा। अगर मेरा मन न भरा, तो मैं लौट आऊंगा।'
देवीदीन ने दृढ़ता से कहा, 'मंजूर।'
रमा ने संकोच से आंखें नीची करके कहा, 'एक बात और है?'
देवीदीन-' 'क्या बात है? कहो।'
'मुझे कुछ कपड़े बनवाने पड़ेंगे।'
'बन जायेंगे।'