जो हरदम मुंह में पान भरे रहता है। मिलने जाओ, तो आंखों से बातें करता है, मगर है हिम्मत का धनी, दो बेर जेहल हो आया है।'
रमा-'आज ज़रा वहां तक जाओगे?'
देवीदीन ने कातर भाव से कहा, 'मुझे भेजकर क्या करोगे? मैं न जा सकूंगा। '
'क्या बहुत दूर है?'
'नहीं, दूर नहीं है।'
'फिर क्या बात है?'
देवीदीन ने अपराधियों के भाव से कहा, 'बात कुछ नहीं है, बुढिया बिगड़ती है। उसे बचन दे चुका हूं कि सुदेसी-बिदेसी के झगड़े में न पड़ूंगा,
जो हरदम मुंह में पान भरे रहता है। मिलने जाओ, तो आंखों से बातें करता है, मगर है हिम्मत का धनी, दो बेर जेहल हो आया है।'
रमा-'आज ज़रा वहां तक जाओगे?'
देवीदीन ने कातर भाव से कहा, 'मुझे भेजकर क्या करोगे? मैं न जा सकूंगा। '
'क्या बहुत दूर है?'
'नहीं, दूर नहीं है।'
'फिर क्या बात है?'
देवीदीन ने अपराधियों के भाव से कहा, 'बात कुछ नहीं है, बुढिया बिगड़ती है। उसे बचन दे चुका हूं कि सुदेसी-बिदेसी के झगड़े में न पड़ूंगा,