यह भी तो हो सकता है कि अख़बार वाले धांधली कर बैठें और तुम्हारा जवाब अपने नाम से छापकर रूपया हजम कर लें।'
रमा ने दुबिधा में पड़कर कहा, 'मैं ही चला जाऊंगा।'
'तुम्हें मैं न जाने दूंगा। कहीं फंस जाओ तो बस!'
'फंसंना तो एक दिन है ही। कब तक छिपा रहूंगा?'
'तो मरने के पहले ही क्यों रोना-पीटना हो जब फंसोगे, तब देखी जाएगी। लाओ, मैं चला जाऊं। बुढिया से कोई बहाना कर दूंगा। अभी भेंट भी हो जाएगी। दफ्तर ही में रहते भी हैं। फिर घूमने-घामने चल देंगे,
यह भी तो हो सकता है कि अख़बार वाले धांधली कर बैठें और तुम्हारा जवाब अपने नाम से छापकर रूपया हजम कर लें।'
रमा ने दुबिधा में पड़कर कहा, 'मैं ही चला जाऊंगा।'
'तुम्हें मैं न जाने दूंगा। कहीं फंस जाओ तो बस!'
'फंसंना तो एक दिन है ही। कब तक छिपा रहूंगा?'
'तो मरने के पहले ही क्यों रोना-पीटना हो जब फंसोगे, तब देखी जाएगी। लाओ, मैं चला जाऊं। बुढिया से कोई बहाना कर दूंगा। अभी भेंट भी हो जाएगी। दफ्तर ही में रहते भी हैं। फिर घूमने-घामने चल देंगे,