जालपा ने सशंक होकर कहा,'यहां किसी वैद्य को नहीं बुलाया?'
'यहां के वैद्यों को देख चुकी हूं, बहन! वैद्य -डारुक्टर सबको देख चुकी!'
'तो कब तक आओगी?'
'कुछ ठीक नहीं। उनकी बीमारी पर है। एक सप्ताह में आ जाऊं, महीने -दो महीने लग जायं, क्या ठीक है, मगर जब तक बीमारी की जड़ न टूट जायगी, न आऊंगी।'
विधि अंतरिक्ष में बैठी हंस रही थी। जालपा मन में मुस्कराई। जिस बीमारी की जड़ जवानी में न टूटी, बुढ़ापे में क्या टूटेगी, लेकिन इस सदिच्छा से सहानुभूति न रखना असंभव था। बोली,
जालपा ने सशंक होकर कहा,'यहां किसी वैद्य को नहीं बुलाया?'
'यहां के वैद्यों को देख चुकी हूं, बहन! वैद्य -डारुक्टर सबको देख चुकी!'
'तो कब तक आओगी?'
'कुछ ठीक नहीं। उनकी बीमारी पर है। एक सप्ताह में आ जाऊं, महीने -दो महीने लग जायं, क्या ठीक है, मगर जब तक बीमारी की जड़ न टूट जायगी, न आऊंगी।'
विधि अंतरिक्ष में बैठी हंस रही थी। जालपा मन में मुस्कराई। जिस बीमारी की जड़ जवानी में न टूटी, बुढ़ापे में क्या टूटेगी, लेकिन इस सदिच्छा से सहानुभूति न रखना असंभव था। बोली,