जालपा ने गंभीर होकर कहा, 'कुछ कहूं, बुरा तो न मानोगी?'
'बुरा मानने की बात होगी तो जरूर बुरा मानूंगी।'
'मैं तुम्हारा दिल दुखाने के लिए नहीं कहती। संभव है, तुम्हें बुरी लगे। तुम अपने मन में सोचो, तुम्हारे इस बहनापे में दया का भाव मिला हुआ है या नहीं? तुम मेरी ग़रीबी पर तरस खाकर---'
रतन ने लपककर दोनों हाथों से उसका मुंह बंद कर दिया और बोली, 'बस अब रहने दो। तुम चाहे जो ख़याल करो, मगर यह भाव कभी मेरे मन में न था और न हो सकता है। मैं तो जानती हूं,
जालपा ने गंभीर होकर कहा, 'कुछ कहूं, बुरा तो न मानोगी?'
'बुरा मानने की बात होगी तो जरूर बुरा मानूंगी।'
'मैं तुम्हारा दिल दुखाने के लिए नहीं कहती। संभव है, तुम्हें बुरी लगे। तुम अपने मन में सोचो, तुम्हारे इस बहनापे में दया का भाव मिला हुआ है या नहीं? तुम मेरी ग़रीबी पर तरस खाकर---'
रतन ने लपककर दोनों हाथों से उसका मुंह बंद कर दिया और बोली, 'बस अब रहने दो। तुम चाहे जो ख़याल करो, मगर यह भाव कभी मेरे मन में न था और न हो सकता है। मैं तो जानती हूं,