वह भला क्या मिलेंगे। दवा खाने का समय तो आ गया न?'
वकील साहब ने दबी ज़बान से कहा, 'लाओ, खा लूं।'
रतन ने दवा निकाली और उन्हें उठाकर पिलाई। इस समय वह न जानेक्यों कुछ भयभीत-सी हो रही थी। एक अस्पष्ट, अज्ञात शंका उसके ह्रदय को दबाए हुए थी। एकाएक उसने कहा, 'उन लोगों में से किसी को तार दे दूं?'
वकील साहब ने प्रश्न की आंखों से देखा। फिर आप ही आप उसका आशय समझकर बोले, 'नहीं-नहीं, किसी को बुलाने की जरूरत नहीं। मैं अच्छा हो रहा हूं।'
वह भला क्या मिलेंगे। दवा खाने का समय तो आ गया न?'
वकील साहब ने दबी ज़बान से कहा, 'लाओ, खा लूं।'
रतन ने दवा निकाली और उन्हें उठाकर पिलाई। इस समय वह न जानेक्यों कुछ भयभीत-सी हो रही थी। एक अस्पष्ट, अज्ञात शंका उसके ह्रदय को दबाए हुए थी। एकाएक उसने कहा, 'उन लोगों में से किसी को तार दे दूं?'
वकील साहब ने प्रश्न की आंखों से देखा। फिर आप ही आप उसका आशय समझकर बोले, 'नहीं-नहीं, किसी को बुलाने की जरूरत नहीं। मैं अच्छा हो रहा हूं।'