ऊल-जलूल बकने लगते हैं। उस वक्त हंसी रोकनी मुश्किल हो जाती है। आज सबेरे कहने लगे,मेरा पेट भक हो गया,मेरा पेट भक हो गया। इसकी रट लगा दी। इसका आशय क्या था, न मैं समझ सकी,
न अम्मां समझ सकीं, पर वह बराबर यही रटे जाते थे,पेट भक हो गया! पेट भक हो गया! आओ कमरे में चलें।'
रतन-'मेरे साथ न चलोगी?'
जालपा-'आज तो न चल सयंगी, बहन।'
'कल आओगी?'
'कह नहीं सकती। दादा का जी कुछ हल्का रहा, तो आऊंगी।'
'नहीं भाई, जरूर आना। तुमसे एक सलाह करनी है।'
ऊल-जलूल बकने लगते हैं। उस वक्त हंसी रोकनी मुश्किल हो जाती है। आज सबेरे कहने लगे,मेरा पेट भक हो गया,मेरा पेट भक हो गया। इसकी रट लगा दी। इसका आशय क्या था, न मैं समझ सकी,
न अम्मां समझ सकीं, पर वह बराबर यही रटे जाते थे,पेट भक हो गया! पेट भक हो गया! आओ कमरे में चलें।'
रतन-'मेरे साथ न चलोगी?'
जालपा-'आज तो न चल सयंगी, बहन।'
'कल आओगी?'
'कह नहीं सकती। दादा का जी कुछ हल्का रहा, तो आऊंगी।'
'नहीं भाई, जरूर आना। तुमसे एक सलाह करनी है।'