'ओ जी ओ पगड़ी, ज़रा इधर आना, तुम्हारा क्या नाम है?'
रमानाथ ने सीनाजोरी के भाव से कहा,'हमारा नाम पूछकर क्या करोगे? मैं क्या चोर हूं?'
'चोर नहीं, तुम साह हो, नाम क्यों नहीं बताते?'
रमा ने एक क्षण आगा-पीछा में पड़कर कहा, 'हीरालाल।'
'घर कहां है?'
'घर!'
'हां, घर ही पूछते हैं।'
'शाहजहांपुर।'
'कौन मुहल्ला-'
रमा शाहजहांपुर न गया था, न कोई कल्पित नाम ही उसे याद आया कि बता दे। दुस्साहस के साथ बोला, 'तुम तो मेरा हुलिया लिख रहे हो!'
'ओ जी ओ पगड़ी, ज़रा इधर आना, तुम्हारा क्या नाम है?'
रमानाथ ने सीनाजोरी के भाव से कहा,'हमारा नाम पूछकर क्या करोगे? मैं क्या चोर हूं?'
'चोर नहीं, तुम साह हो, नाम क्यों नहीं बताते?'
रमा ने एक क्षण आगा-पीछा में पड़कर कहा, 'हीरालाल।'
'घर कहां है?'
'घर!'
'हां, घर ही पूछते हैं।'
'शाहजहांपुर।'
'कौन मुहल्ला-'
रमा शाहजहांपुर न गया था, न कोई कल्पित नाम ही उसे याद आया कि बता दे। दुस्साहस के साथ बोला, 'तुम तो मेरा हुलिया लिख रहे हो!'