वाला आदमी नहीं है। इतने रूपये तो एक-एक दिन जुए में हार-जीत गया हूं। अभी घर बेच दूं, तो दस हज़ार की मालियत है। क्या सिर पर लाद कर ले जाऊंगा। दारोग़ाजी, अभी भैया को हिरासत में न भेजो, मैं रूपये की गिकर करके थोड़ी देर में आता हूं।'
देवीदीन चला गया तो दारोग़ाजी ने सह्रदयता से भरे स्वर में कहा, 'है तो खुर्राट, मगर बडा नेक।तुमने इसे कौनसी बूटी सुंघा दी?'
रमा ने कहा, 'गरीबों पर सभी को रहम आता है।'
दारोग़ा ने मुस्कराकर कहा,
वाला आदमी नहीं है। इतने रूपये तो एक-एक दिन जुए में हार-जीत गया हूं। अभी घर बेच दूं, तो दस हज़ार की मालियत है। क्या सिर पर लाद कर ले जाऊंगा। दारोग़ाजी, अभी भैया को हिरासत में न भेजो, मैं रूपये की गिकर करके थोड़ी देर में आता हूं।'
देवीदीन चला गया तो दारोग़ाजी ने सह्रदयता से भरे स्वर में कहा, 'है तो खुर्राट, मगर बडा नेक।तुमने इसे कौनसी बूटी सुंघा दी?'
रमा ने कहा, 'गरीबों पर सभी को रहम आता है।'
दारोग़ा ने मुस्कराकर कहा,