'अच्छा, म्युनिसिपैलिटी के दफ्तर से पूछिए।'
दारोग़ा ने फिर नंबर मिलाया। सवाल-जवाब होने लगा।
दारोग़ा -'आपके यहां रमानाथ कोई क्लर्क था?
जवाब, 'जी हां, था।
दारोग़ा -'वह कुछ रूपये ग़बन करके भागा है?
जवाब,'नहीं। वह घर से भागा है, पर ग़बन नहीं किया। क्या वह आपके यहां है?'
दारोग़ा -'जी हां, हमने उसे गिरफ्तार किया है। वह ख़ुद कहता है कि मैंने रूपये ग़बन किए। बात क्या है?'
जवाब, 'पुलिस तो लाल बुझक्कड़ है। ज़रा दिमाग़ लडाइए।'
'अच्छा, म्युनिसिपैलिटी के दफ्तर से पूछिए।'
दारोग़ा ने फिर नंबर मिलाया। सवाल-जवाब होने लगा।
दारोग़ा -'आपके यहां रमानाथ कोई क्लर्क था?
जवाब, 'जी हां, था।
दारोग़ा -'वह कुछ रूपये ग़बन करके भागा है?
जवाब,'नहीं। वह घर से भागा है, पर ग़बन नहीं किया। क्या वह आपके यहां है?'
दारोग़ा -'जी हां, हमने उसे गिरफ्तार किया है। वह ख़ुद कहता है कि मैंने रूपये ग़बन किए। बात क्या है?'
जवाब, 'पुलिस तो लाल बुझक्कड़ है। ज़रा दिमाग़ लडाइए।'