दारोग़ा -'हम लोग बेगुनाहों को फंसाएंगे ही क्यों? यह तो सोचो।'
देवीदीन-'यह सब भुगते बैठा हूं, दारोग़ाजी! इससे तो यही अच्छा है कि आप इनका चालान कर दें। साल-दो साल का जेहल ही तो होगा। एक अधरम के दंड से बचने के लिए बेगुनाहों का ख़ून तो सिर पर न चढ़ेगा! '
रमा ने भीरूता से कहा, 'मैंने ख़ूब सोच लिया है दादा, सब काग़ज़ देख लिए हैं, इसमें कोई बेगुनाह नहीं है।'
देवीदीन ने उदास होकर कहा,'होगा भाई! जान भी तो प्यारी होती
दारोग़ा -'हम लोग बेगुनाहों को फंसाएंगे ही क्यों? यह तो सोचो।'
देवीदीन-'यह सब भुगते बैठा हूं, दारोग़ाजी! इससे तो यही अच्छा है कि आप इनका चालान कर दें। साल-दो साल का जेहल ही तो होगा। एक अधरम के दंड से बचने के लिए बेगुनाहों का ख़ून तो सिर पर न चढ़ेगा! '
रमा ने भीरूता से कहा, 'मैंने ख़ूब सोच लिया है दादा, सब काग़ज़ देख लिए हैं, इसमें कोई बेगुनाह नहीं है।'
देवीदीन ने उदास होकर कहा,'होगा भाई! जान भी तो प्यारी होती