यह कहता हुआ देवीदीन तेज़ी से कदम उठाता हुआ चल दिया, मानो वहां उसका दम घुट रहा हो दारोग़ा ने उसे पुकारा, पर उसने फिरकर न देखा। उसके मुख पर पराभूत वेदना छाई हुई थी।
जग्गो ने पूछा, 'भैया नहीं आ रहे हैं?'
देवीदीन ने सड़क की ओर ताकते हुए कहा, 'भैया अब नहीं आवेंगे। जब अपने ही अपने न हुए तो बेगाने तो बेगाने हैं ही!' वह चला गया। बुढिया भी पीछे-पीछे भुनभुनाती चली।
पैंतीस
रूदन में कितना उल्लास, कितनी शांति, कितना बल है। जो कभी एकांत में बैठकर,
यह कहता हुआ देवीदीन तेज़ी से कदम उठाता हुआ चल दिया, मानो वहां उसका दम घुट रहा हो दारोग़ा ने उसे पुकारा, पर उसने फिरकर न देखा। उसके मुख पर पराभूत वेदना छाई हुई थी।
जग्गो ने पूछा, 'भैया नहीं आ रहे हैं?'
देवीदीन ने सड़क की ओर ताकते हुए कहा, 'भैया अब नहीं आवेंगे। जब अपने ही अपने न हुए तो बेगाने तो बेगाने हैं ही!' वह चला गया। बुढिया भी पीछे-पीछे भुनभुनाती चली।
पैंतीस
रूदन में कितना उल्लास, कितनी शांति, कितना बल है। जो कभी एकांत में बैठकर,