कि आदमी मर रहा है, पर बिना भेंट लिये कदम न उठावेंगे! '
रमेश बाबू ने चिंतित होकर कहा, 'यह तो आपने बुरी ख़बर सुनाई, मगर आपकी छुट्टी नामंजूर हुई तो क्या होगा?'
मुंशीजी ने माथा ठोंकर कहा,'होगा क्या, घर बैठ रहूंगा। साहब पूछेंगे तो साफ कह दूंगा, मैं सर्जन के पास गया था, उसने छुट्टी नहीं दी। आख़िर इन्हें क्यों सरकार ने नौकर रक्खा है। महज़ कुर्सी की शोभा बढ़ाने के लिए? मुझे डिसमिस हो जाना मंज़ूर है, पर सर्टिगिष्धट न दूंगा।
कि आदमी मर रहा है, पर बिना भेंट लिये कदम न उठावेंगे! '
रमेश बाबू ने चिंतित होकर कहा, 'यह तो आपने बुरी ख़बर सुनाई, मगर आपकी छुट्टी नामंजूर हुई तो क्या होगा?'
मुंशीजी ने माथा ठोंकर कहा,'होगा क्या, घर बैठ रहूंगा। साहब पूछेंगे तो साफ कह दूंगा, मैं सर्जन के पास गया था, उसने छुट्टी नहीं दी। आख़िर इन्हें क्यों सरकार ने नौकर रक्खा है। महज़ कुर्सी की शोभा बढ़ाने के लिए? मुझे डिसमिस हो जाना मंज़ूर है, पर सर्टिगिष्धट न दूंगा।