रमेश-'दस्तख़त तो रमा बाबू का है, बिलकुल साफ धोखा हो ही नहीं सकता मान गया बहूजी तुम्हें! वाह, क्या हिकमत निकाली है! हम सबके कान काट लिए। किसी को न सूझी। अब जो सोचते हैं, तो मालूम होता है, कितनी आसान बात थी। किसी को जाना चाहिए जो बचा को पकड़कर घसीट लाए। यह बातचीत हो रही थी कि रतन आ पहुंची। जालपा उसे देखते ही वहां
से निकली और उसके गले से लिपटकर बोली, 'बहन कलकत्ता से पत्र आ गया। वहीं हैं।'रतन-'मेरे सिर की कसम?'
जालपा-'हां, सच कहती हूं। ख़त देखो न!'
रमेश-'दस्तख़त तो रमा बाबू का है, बिलकुल साफ धोखा हो ही नहीं सकता मान गया बहूजी तुम्हें! वाह, क्या हिकमत निकाली है! हम सबके कान काट लिए। किसी को न सूझी। अब जो सोचते हैं, तो मालूम होता है, कितनी आसान बात थी। किसी को जाना चाहिए जो बचा को पकड़कर घसीट लाए। यह बातचीत हो रही थी कि रतन आ पहुंची। जालपा उसे देखते ही वहां
से निकली और उसके गले से लिपटकर बोली, 'बहन कलकत्ता से पत्र आ गया। वहीं हैं।'रतन-'मेरे सिर की कसम?'
जालपा-'हां, सच कहती हूं। ख़त देखो न!'