'तो कुछ जलपान तो कर लो। दोपहर को भी तो कुछ नहीं खाया था,
मिठाई लाऊं- लाओ, पंखी मुझे दे दो।'
देवीदीन ने पंखिया दे दी। बुढिया झलने लगी। दो-तीन मिनट तक आंखें बंद करके बैठे रहने के बाद देवीदीन ने कहा, 'आज भैया की गवाही खत्म हो गई!
बुढिया का हाथ रूक गया। बोली, 'तो कल से वह घर आ जाएंगे?'
देवीदीन-'अभी नहीं छुट्टी मिली जाती, यही बयान दीवानी में देना पड़ेगा। और अब वह यहां आने ही क्यों लगे! कोई अच्छी जगह मिल जायगी,घोड़े पर चढ़े-चढ़े घूमेंगे,
'तो कुछ जलपान तो कर लो। दोपहर को भी तो कुछ नहीं खाया था,
मिठाई लाऊं- लाओ, पंखी मुझे दे दो।'
देवीदीन ने पंखिया दे दी। बुढिया झलने लगी। दो-तीन मिनट तक आंखें बंद करके बैठे रहने के बाद देवीदीन ने कहा, 'आज भैया की गवाही खत्म हो गई!
बुढिया का हाथ रूक गया। बोली, 'तो कल से वह घर आ जाएंगे?'
देवीदीन-'अभी नहीं छुट्टी मिली जाती, यही बयान दीवानी में देना पड़ेगा। और अब वह यहां आने ही क्यों लगे! कोई अच्छी जगह मिल जायगी,घोड़े पर चढ़े-चढ़े घूमेंगे,