लेकिन फिर कुछ सोचकर उसे आगे बढ़ा दिया।
रमा ने तेज़ होकर कहा, 'आप तो मुझे कैदी बनाए हुए हैं।'
नायब ने खिसियाकर कहा, 'आप तो जानते हैं, डिप्टी साहब कितनी जल्द जामे से बाहर हो जाते हैं।'
बंगले पर पहुंचकर रमा सोचने लगा, जालपा से कैसे मिलूं। वहां जालपा ही थी, इसमें अब उसे कोई शुबहा न था। आंखों को कैसे धोखा देता। ह्रदय में एक ज्वाला-सी उठी हुई थी, क्या करूं? कैसे जाऊं?' उसे कपड़े उतारने की सुधि भी न रही। पंद्रह मिनट तक
लेकिन फिर कुछ सोचकर उसे आगे बढ़ा दिया।
रमा ने तेज़ होकर कहा, 'आप तो मुझे कैदी बनाए हुए हैं।'
नायब ने खिसियाकर कहा, 'आप तो जानते हैं, डिप्टी साहब कितनी जल्द जामे से बाहर हो जाते हैं।'
बंगले पर पहुंचकर रमा सोचने लगा, जालपा से कैसे मिलूं। वहां जालपा ही थी, इसमें अब उसे कोई शुबहा न था। आंखों को कैसे धोखा देता। ह्रदय में एक ज्वाला-सी उठी हुई थी, क्या करूं? कैसे जाऊं?' उसे कपड़े उतारने की सुधि भी न रही। पंद्रह मिनट तक