चटनी-अचार न हो, उसकी तृप्ति न होती थी। बिगड़कर बोला, 'क्या खाऊं तुम्हारा सिर- थाली उठा ले जाओ।'
रसोइए ने डरते-डरते कहा,'हुजूर, इतनी जल्द और चीजें कैसे बनाता! अभी कुल दो घंटे तो आए हुए हैं।'
'दो घंटे तुम्हारे लिए थोड़े होते हैं!'
'अब हुजूर से क्या कहूं!'
'मत बको।'
'हुजूर'
'मत बको - डैम!'
रसोइए ने फिर कुछ न कहा। बोतल लाया, बर्फ तोड़कर ग्लास में डाली और पीछे हटकर खडाहो गया। रमा को इतना क्रोध आ रहा था कि रसोइए
चटनी-अचार न हो, उसकी तृप्ति न होती थी। बिगड़कर बोला, 'क्या खाऊं तुम्हारा सिर- थाली उठा ले जाओ।'
रसोइए ने डरते-डरते कहा,'हुजूर, इतनी जल्द और चीजें कैसे बनाता! अभी कुल दो घंटे तो आए हुए हैं।'
'दो घंटे तुम्हारे लिए थोड़े होते हैं!'
'अब हुजूर से क्या कहूं!'
'मत बको।'
'हुजूर'
'मत बको - डैम!'
रसोइए ने फिर कुछ न कहा। बोतल लाया, बर्फ तोड़कर ग्लास में डाली और पीछे हटकर खडाहो गया। रमा को इतना क्रोध आ रहा था कि रसोइए