बुढिया ने ऊपर ही से कहा, 'पूछो, कौन आदमी है, कहां से आया है? '
देवीदीन ने विनोद किया, 'कहता है, मैं जो कुछ कहूंगा, बहू से ही कहूंगा।'
'कोई चिट्ठी लाया है?'
'नहीं!''
सन्नाटा हो गया। देवीदीन ने एक क्षण के बाद पूछा, 'कह दूं, लौट जाय? '
जालपा जीने पर आकर बोली, 'कौन आदमी है, पूछती तो हूं!'
'कहता है, बडी दूर से आया हूं!'
'है कहां?'
'यह क्या खडाहै!'
'अच्छा, बुला लो!'
रमा चादर ओढ़े, कुछ झिझकता, कुछ झेंपता,
बुढिया ने ऊपर ही से कहा, 'पूछो, कौन आदमी है, कहां से आया है? '
देवीदीन ने विनोद किया, 'कहता है, मैं जो कुछ कहूंगा, बहू से ही कहूंगा।'
'कोई चिट्ठी लाया है?'
'नहीं!''
सन्नाटा हो गया। देवीदीन ने एक क्षण के बाद पूछा, 'कह दूं, लौट जाय? '
जालपा जीने पर आकर बोली, 'कौन आदमी है, पूछती तो हूं!'
'कहता है, बडी दूर से आया हूं!'
'है कहां?'
'यह क्या खडाहै!'
'अच्छा, बुला लो!'
रमा चादर ओढ़े, कुछ झिझकता, कुछ झेंपता,