'और जानती हो, मैं क्या करूं?'
'नहीं! शायद गोली मार दोगी!'
'ना! गोली न मारूं। सरे बाज़ार खडा करके पांच सौ जूते लगवाऊं। चांद गंजी होजाय!'
'उस पर तुम्हें ज़रा भी दया नहीं आयगी?'
टयह कुछ कम दया है? उसकी पूरी सज़ा तो यह है कि किसी ऊंची पहाड़ी से ढकेल दिया जाय! अगर यह महाशय अमेरीका में होते, तो ज़िन्दा जला दिये जाते!'
एक वृद्धा ने इन युवतियों का तिरस्कार करके कहा, ' क्यों व्यर्थ में मुंह ख़राब करती हो? वह घृणा के योग्य नहीं,
'और जानती हो, मैं क्या करूं?'
'नहीं! शायद गोली मार दोगी!'
'ना! गोली न मारूं। सरे बाज़ार खडा करके पांच सौ जूते लगवाऊं। चांद गंजी होजाय!'
'उस पर तुम्हें ज़रा भी दया नहीं आयगी?'
टयह कुछ कम दया है? उसकी पूरी सज़ा तो यह है कि किसी ऊंची पहाड़ी से ढकेल दिया जाय! अगर यह महाशय अमेरीका में होते, तो ज़िन्दा जला दिये जाते!'
एक वृद्धा ने इन युवतियों का तिरस्कार करके कहा, ' क्यों व्यर्थ में मुंह ख़राब करती हो? वह घृणा के योग्य नहीं,