पकड़ ली। आख़िर उसने वहां से उठकर चले आने ही में कुशल समझी।
देवीदीन उसे उतरते देखकर बरामदे में चला आया और दया से सने हुए स्वर में बोला, ' क्या घर चलती हो, बहूजी?'
जालपा ने आंसुओं के वेग को रोककर कहा, 'हां, यहां अब नहीं बैठा जाता।'
हाते के बाहर निकलकर देवीदीन ने जालपा को सांत्वना देने के इरादे से कहा, ' पुलिस ने जिसे एक बार बूटी सुंघा दी, उस पर किसी दूसरी चीज़ का असर नहीं हो सकता।'
जालपा ने घृणा-भाव से कहा, 'यह सब कायरों के लिए है।'
पकड़ ली। आख़िर उसने वहां से उठकर चले आने ही में कुशल समझी।
देवीदीन उसे उतरते देखकर बरामदे में चला आया और दया से सने हुए स्वर में बोला, ' क्या घर चलती हो, बहूजी?'
जालपा ने आंसुओं के वेग को रोककर कहा, 'हां, यहां अब नहीं बैठा जाता।'
हाते के बाहर निकलकर देवीदीन ने जालपा को सांत्वना देने के इरादे से कहा, ' पुलिस ने जिसे एक बार बूटी सुंघा दी, उस पर किसी दूसरी चीज़ का असर नहीं हो सकता।'
जालपा ने घृणा-भाव से कहा, 'यह सब कायरों के लिए है।'