जान बचाने के लिए इतने आदमियों की गर्दन पर छुरी चलाई! मैंने चलते-चलते समझाया था, उसका कुछ असर न हुआ! ओह, तुम इतने धन-लोलुप हो, इतने लोभी! कोई हरज नहीं। जालपा अपने पालन और रक्षा के लिए तुम्हारी मुहताज नहीं।'इन्हीं संतप्त भावनाओं में डूबी हुई जालपा घर पहुंची।
तैंतालीस
एक महीना गुज़र गया। जालपा कई दिन तक बहुत विकल रही। कई बार उन्माद - सा हुआ कि अभी सारी कथा किसी पत्र में छपवा दूं, सारी कलई खोल दूं, सारे हवाई किले ढा दूंऋ
जान बचाने के लिए इतने आदमियों की गर्दन पर छुरी चलाई! मैंने चलते-चलते समझाया था, उसका कुछ असर न हुआ! ओह, तुम इतने धन-लोलुप हो, इतने लोभी! कोई हरज नहीं। जालपा अपने पालन और रक्षा के लिए तुम्हारी मुहताज नहीं।'इन्हीं संतप्त भावनाओं में डूबी हुई जालपा घर पहुंची।
तैंतालीस
एक महीना गुज़र गया। जालपा कई दिन तक बहुत विकल रही। कई बार उन्माद - सा हुआ कि अभी सारी कथा किसी पत्र में छपवा दूं, सारी कलई खोल दूं, सारे हवाई किले ढा दूंऋ