गबन - Gaban

पता न था। धीरे-धीरे आठ बज गए और देवी न लौटा। सहसा एक मोटर द्वार पर आकर रूकी और रमा ने उतरकर जग्गो से पूछा, 'सब कुशल-मंगल है न दादी! दादा कहां गए हैं?'

जग्गो ने एक बार उसकी ओर देखा और मुंह उधर लिया। केवल इतना बोली, 'कहीं गए होंगे, मैं नहीं जानती।'

रमा ने सोने की चार चूडियां जेब से निकालकर जग्गो के पैरों पर रख दीं और बोला, 'यह तुम्हारे लिए लाया हूं दादी, पहनो, ढीली तो नहीं हैं?'

जग्गो ने चूडियां उठाकर ज़मीन पर पटक दीं और आंखें निकालकर बोली,


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पता न था। धीरे-धीरे आठ बज गए और देवी न लौटा। सहसा एक मोटर द्वार पर आकर रूकी और रमा ने उतरकर जग्गो से पूछा, 'सब कुशल-मंगल है न दादी! दादा कहां गए हैं?'

जग्गो ने एक बार उसकी ओर देखा और मुंह उधर लिया। केवल इतना बोली, 'कहीं गए होंगे, मैं नहीं जानती।'

रमा ने सोने की चार चूडियां जेब से निकालकर जग्गो के पैरों पर रख दीं और बोला, 'यह तुम्हारे लिए लाया हूं दादी, पहनो, ढीली तो नहीं हैं?'

जग्गो ने चूडियां उठाकर ज़मीन पर पटक दीं और आंखें निकालकर बोली,


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