अलंकार - Alankar

परणाम ! मेरी यही इच्छा है कि अन्त तक तुम विश्वास, घृणा और परेम के पथ पर आऱु रहो। इसी भांति तुम नित्य अपने शत्रुओं को कोसते और अपने अनुयायियों से परेम करते रहो। थायस, चिरंजीवी रहो। तुम मुझे भूल जाओगी, किन्तु मैं तुम्हें न भूलूंगा। तुम यावज्जीवन मेरे हृदय में मूर्तिमान रहोगी।'

उनसे बिदा होकर निसियास इस्कन्द्रिया की कबिरस्तान के निकट पेचदार गलियों में विचारपूर्ण गति से चला। इस मार्ग में अधिकतर कुम्हार रहते थे, जो मुर्दों के साथ दफन करने के लिए खिलौने,


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परणाम ! मेरी यही इच्छा है कि अन्त तक तुम विश्वास, घृणा और परेम के पथ पर आऱु रहो। इसी भांति तुम नित्य अपने शत्रुओं को कोसते और अपने अनुयायियों से परेम करते रहो। थायस, चिरंजीवी रहो। तुम मुझे भूल जाओगी, किन्तु मैं तुम्हें न भूलूंगा। तुम यावज्जीवन मेरे हृदय में मूर्तिमान रहोगी।'

उनसे बिदा होकर निसियास इस्कन्द्रिया की कबिरस्तान के निकट पेचदार गलियों में विचारपूर्ण गति से चला। इस मार्ग में अधिकतर कुम्हार रहते थे, जो मुर्दों के साथ दफन करने के लिए खिलौने,


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