वस्त्र पर टाट का बखिया कर दिया गया है ! जब दिनकर ने अपना परकाश फैलाया, तो उनके सामने लाइबिया की मरुभूमि एक विस्तृत सिंह चर्म की भांति फैली हुई दिखाई दी। मरुभूमि के उस सिरे पर कई छुहारे के वृक्षों के मध्य में कई सफेद झोंपड़ियां परभात के मन्द परकाश में झलक रही थीं।
थायस ने पूछा-'पूज्य पिता, क्या वह ईश्वरीय ज्योति का मन्दिर है ?'
'हां पिरय बहन, मेरी पिरय पुत्री, वही मुक्तिगृह है, जहां मैं तुझे अपने ही हाथों से बन्द करुंगा।'
वस्त्र पर टाट का बखिया कर दिया गया है ! जब दिनकर ने अपना परकाश फैलाया, तो उनके सामने लाइबिया की मरुभूमि एक विस्तृत सिंह चर्म की भांति फैली हुई दिखाई दी। मरुभूमि के उस सिरे पर कई छुहारे के वृक्षों के मध्य में कई सफेद झोंपड़ियां परभात के मन्द परकाश में झलक रही थीं।
थायस ने पूछा-'पूज्य पिता, क्या वह ईश्वरीय ज्योति का मन्दिर है ?'
'हां पिरय बहन, मेरी पिरय पुत्री, वही मुक्तिगृह है, जहां मैं तुझे अपने ही हाथों से बन्द करुंगा।'