रंगभूमि - Rangbhumi



मिसेज़ सेवक-मैं अपनी भूल स्वीकार करती हूँ। मुझे अंदाज से शकर निकाल देनी चाहिए थी।

ईश्वर सेवक-अरे, तो आज यह कोई नई बात थोड़े ही है! रोज तो यही रोना रहता है। जॉन समझता है, मैं घर का मालिक हूँ, रुपये कमाता हूँ, खर्च क्यों न करूँ? मगर धान कमाना एक बात है, उसका सद्व्यय करना दूसरी बात। होशियार आदमी उसे कहते हैं, जो धान का उचित उपयोग करे। इधार से लाकर उधार खर्च कर दिया, तो क्या फायदा? इससे तो न लाना ही अच्छा। समझाता ही रहा;


102 of 2783



मिसेज़ सेवक-मैं अपनी भूल स्वीकार करती हूँ। मुझे अंदाज से शकर निकाल देनी चाहिए थी।

ईश्वर सेवक-अरे, तो आज यह कोई नई बात थोड़े ही है! रोज तो यही रोना रहता है। जॉन समझता है, मैं घर का मालिक हूँ, रुपये कमाता हूँ, खर्च क्यों न करूँ? मगर धान कमाना एक बात है, उसका सद्व्यय करना दूसरी बात। होशियार आदमी उसे कहते हैं, जो धान का उचित उपयोग करे। इधार से लाकर उधार खर्च कर दिया, तो क्या फायदा? इससे तो न लाना ही अच्छा। समझाता ही रहा;


102 of 2783