रह सकती। अगर यही मान लूँ कि मेरे लिए चारों तरफ से द्वार बंद है, तो भी मैं आत्मा को बेचने की अपेक्षा भूखों मर जाना कहीं अच्छा समझती हूँ।
प्रभु सेवक-दुनिया उससे कहीं तंग है, जितना तुम समझती हो।
सोफ़िया-कब्र के लिए तो जगह निकल ही आएगी।
सहसा ईश्वर सेवक ने जाकर उसे छाती से लगा लिया, और अपने भक्ति-गद्गद नेत्रा-जल से उसके संतप्त हृदय को शांत करने लगे। सोफ़िया को उनकी श्रध्दालुता पर दया आ गई। कौन ऐसा निर्दय प्राणी है, जो
रह सकती। अगर यही मान लूँ कि मेरे लिए चारों तरफ से द्वार बंद है, तो भी मैं आत्मा को बेचने की अपेक्षा भूखों मर जाना कहीं अच्छा समझती हूँ।
प्रभु सेवक-दुनिया उससे कहीं तंग है, जितना तुम समझती हो।
सोफ़िया-कब्र के लिए तो जगह निकल ही आएगी।
सहसा ईश्वर सेवक ने जाकर उसे छाती से लगा लिया, और अपने भक्ति-गद्गद नेत्रा-जल से उसके संतप्त हृदय को शांत करने लगे। सोफ़िया को उनकी श्रध्दालुता पर दया आ गई। कौन ऐसा निर्दय प्राणी है, जो