रंगभूमि - Rangbhumi



'शांति-समर में कभी भूलकर धैर्य नहीं खोना होगा;

वज्र-प्रहार भले सिर पर हो, नहीं किंतु रोना होगा।

अरि से बदला लेने का मन-बीज नहीं बोना होगा;

घर में कान तूल देकर फिर तुझे नहीं सोना होगा।

देश-दाग़ को रुधिार वारि से हर्षित हो धोना होगा;

देश-कार्य की सारी गठरी सिर पर रख ढोना होगा।

ऑंखें लाल, भवें टेढ़ी कर, क्रोध नहीं करना होगा;

बलि-वेदी पर तुझे हर्ष से चढ़कर कट मरना होगा।

नश्वर है नर-देह, मौत से कभी नहीं डरना होगा;


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'शांति-समर में कभी भूलकर धैर्य नहीं खोना होगा;

वज्र-प्रहार भले सिर पर हो, नहीं किंतु रोना होगा।

अरि से बदला लेने का मन-बीज नहीं बोना होगा;

घर में कान तूल देकर फिर तुझे नहीं सोना होगा।

देश-दाग़ को रुधिार वारि से हर्षित हो धोना होगा;

देश-कार्य की सारी गठरी सिर पर रख ढोना होगा।

ऑंखें लाल, भवें टेढ़ी कर, क्रोध नहीं करना होगा;

बलि-वेदी पर तुझे हर्ष से चढ़कर कट मरना होगा।

नश्वर है नर-देह, मौत से कभी नहीं डरना होगा;


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