पर अपना क्या काबू है? यह स्नेह और कहाँ मिलेगा?
इंदु यह भाव न समझ सकी। अपनी स्वाभाविक सरलता से बोली-कहीं विवाह की बातचीत हो रही है क्या?
उसकी समझ में विवाह के सिवा लड़कियों के इतना दु:खी होने का कोई कारण न था।
सोफिया-मैंने तो इरादा कर लिया है कि विवाह न करूँगी।
इंदु-क्यों?
सोफ़िया-इसलिए कि विवाह से मुझे अपनी धार्मिक स्वाधीनता त्याग देनी पड़ेगी। धर्म विचार-स्वतंत्रता का गला घोंट देता है। मैं अपनी आत्मा को किसी
पर अपना क्या काबू है? यह स्नेह और कहाँ मिलेगा?
इंदु यह भाव न समझ सकी। अपनी स्वाभाविक सरलता से बोली-कहीं विवाह की बातचीत हो रही है क्या?
उसकी समझ में विवाह के सिवा लड़कियों के इतना दु:खी होने का कोई कारण न था।
सोफिया-मैंने तो इरादा कर लिया है कि विवाह न करूँगी।
इंदु-क्यों?
सोफ़िया-इसलिए कि विवाह से मुझे अपनी धार्मिक स्वाधीनता त्याग देनी पड़ेगी। धर्म विचार-स्वतंत्रता का गला घोंट देता है। मैं अपनी आत्मा को किसी