ने प्रेममयी सरलता से कहा-वे लोग नाराज हुए होंगे, तो तुम बहुत रोयी होगी। इन प्यारी ऑंखों से आँसू बहे होंगे। मुझसे किसी का रोना नहीं देखा जाता।
सोफिया-पहले रोया करती थी, अब परवा नहीं करती।
इंदु-मुझे तो कभी कोई कुछ कह देता है, तो हृदय पर तीर-सा लगता है। दिन-दिन भर रोती ही रह जाती हूँ। आँसू ही नहीं थमते। वह बात बार-बार हृदय में चुभा करती है। सच पूछो, तो मुझे किसी के क्रोध पर रोना नहीं आता, रोना आता है अपने ऊपर कि मैंने उन्हें क्यों नाराज किया,
ने प्रेममयी सरलता से कहा-वे लोग नाराज हुए होंगे, तो तुम बहुत रोयी होगी। इन प्यारी ऑंखों से आँसू बहे होंगे। मुझसे किसी का रोना नहीं देखा जाता।
सोफिया-पहले रोया करती थी, अब परवा नहीं करती।
इंदु-मुझे तो कभी कोई कुछ कह देता है, तो हृदय पर तीर-सा लगता है। दिन-दिन भर रोती ही रह जाती हूँ। आँसू ही नहीं थमते। वह बात बार-बार हृदय में चुभा करती है। सच पूछो, तो मुझे किसी के क्रोध पर रोना नहीं आता, रोना आता है अपने ऊपर कि मैंने उन्हें क्यों नाराज किया,