अम्माँ को नाराज न करूँगी। कृष्ण तो अंतर्यामी हैं, उन्हें प्रसन्न रखने के लिए उपासना की जरूरत नहीं। उपासना तो केवल अपने मन के संतोष के लिए है।
सोफ़िया-(आश्चर्य से) आपको जरा भी मानसिक पीड़ा न होगी?
इंदु-अवश्य होगी; पर उनकी खातिर मैं सह लूँगी।
सोफिया-अच्छा, अगर वह आपकी इच्छा के विरुध्द आपका विवाह करना चाहें तो?
इंदु-(लजाते हुए) वह समस्या तो हल हो चुकी। माँ-बाप ने जिससे उचित समझा, कर दिया। मैंने जबान तक नहीं खोली।
अम्माँ को नाराज न करूँगी। कृष्ण तो अंतर्यामी हैं, उन्हें प्रसन्न रखने के लिए उपासना की जरूरत नहीं। उपासना तो केवल अपने मन के संतोष के लिए है।
सोफ़िया-(आश्चर्य से) आपको जरा भी मानसिक पीड़ा न होगी?
इंदु-अवश्य होगी; पर उनकी खातिर मैं सह लूँगी।
सोफिया-अच्छा, अगर वह आपकी इच्छा के विरुध्द आपका विवाह करना चाहें तो?
इंदु-(लजाते हुए) वह समस्या तो हल हो चुकी। माँ-बाप ने जिससे उचित समझा, कर दिया। मैंने जबान तक नहीं खोली।