जो भोजन का यथार्थ उद्देश्य है।
सोफिया-आपकी धार्मिक स्वाधीनता में तो बाधा नहीं डालते?
इंदु-नहीं। उन्हें इतना अवकाश कहाँ?
सोफ़िया-तब तो मैं आपको मुबारकबाद दूँगी।
इंदु-अगर किसी कैदी को बधाई देना उचित हो, तो शौक से दो।
सोफ़िया-बेड़ी प्रेम की हो तो?
इंदु-ऐसा होता, तो मैं तुमसे बधाई देने को आग्रह करती। मैं बँधा गई, वह मुक्त हैं। मुझे यहाँ आए तीन महीने होने आते हैं; पर तीन बार से ज्यादा नहीं आए; और वह भी एक-एक घंटे के लिए। इसी शहर में रहते हैं,
जो भोजन का यथार्थ उद्देश्य है।
सोफिया-आपकी धार्मिक स्वाधीनता में तो बाधा नहीं डालते?
इंदु-नहीं। उन्हें इतना अवकाश कहाँ?
सोफ़िया-तब तो मैं आपको मुबारकबाद दूँगी।
इंदु-अगर किसी कैदी को बधाई देना उचित हो, तो शौक से दो।
सोफ़िया-बेड़ी प्रेम की हो तो?
इंदु-ऐसा होता, तो मैं तुमसे बधाई देने को आग्रह करती। मैं बँधा गई, वह मुक्त हैं। मुझे यहाँ आए तीन महीने होने आते हैं; पर तीन बार से ज्यादा नहीं आए; और वह भी एक-एक घंटे के लिए। इसी शहर में रहते हैं,