रंगभूमि - Rangbhumi

ने उन्हें क्षमा नहीं किया। सैकड़ों बुलावे आए; पर उन्हें देखने तक न गईं। उन्हें ज्यों ही यह बात मालूम होगी, तुम्हारी दूनी इज्जत करने लगेंगी।

सोफी ने ऑंखों में आँसू भरकर कहा-बहन, मेरी लाज अब आप ही के हाथ में है।

इंदु ने उसका सिर अपनी जाँघ पर रखकर कहा-वह मुझे अपनी लाज से कम प्रिय नहीं है।

उधार मि. जॉन सेवक को कुँवर साहब का पत्र मिला, तो जाकर स्त्री से बोले-देखा, मैं कहता न था कि सोफी पर कोई संकट आ पड़ा। यह देखो, कुँवर


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ने उन्हें क्षमा नहीं किया। सैकड़ों बुलावे आए; पर उन्हें देखने तक न गईं। उन्हें ज्यों ही यह बात मालूम होगी, तुम्हारी दूनी इज्जत करने लगेंगी।

सोफी ने ऑंखों में आँसू भरकर कहा-बहन, मेरी लाज अब आप ही के हाथ में है।

इंदु ने उसका सिर अपनी जाँघ पर रखकर कहा-वह मुझे अपनी लाज से कम प्रिय नहीं है।

उधार मि. जॉन सेवक को कुँवर साहब का पत्र मिला, तो जाकर स्त्री से बोले-देखा, मैं कहता न था कि सोफी पर कोई संकट आ पड़ा। यह देखो, कुँवर


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