रंगभूमि - Rangbhumi

उन्हें खुदा ने बहुतेरी मोटरें दी है। प्रभु, दास को अपनी शरण में लो, अब देर न करो, मेरी सोफी बेचारी वहाँ बेगानों में पड़ी हुई है, न जाने इतने दिन किस तरह काटे होंगे। खुदा उसे सच्चा रास्ता दिखाए। मेरी ऑंखें उसे ढूँढ़ रही हैं। वहाँ उस बेचारी का कौन पुछत्तार होगा, अमीरों के घर में गरीबों का कहाँ गुजर!

जॉन सेवक-अच्छा ही हुआ। यहाँ होती, तो रोजाना डॉक्टर की फीस न देनी पड़ती?

ईश्वर सेवक-डॉक्टर का क्या काम था। ईश्वर की दया


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उन्हें खुदा ने बहुतेरी मोटरें दी है। प्रभु, दास को अपनी शरण में लो, अब देर न करो, मेरी सोफी बेचारी वहाँ बेगानों में पड़ी हुई है, न जाने इतने दिन किस तरह काटे होंगे। खुदा उसे सच्चा रास्ता दिखाए। मेरी ऑंखें उसे ढूँढ़ रही हैं। वहाँ उस बेचारी का कौन पुछत्तार होगा, अमीरों के घर में गरीबों का कहाँ गुजर!

जॉन सेवक-अच्छा ही हुआ। यहाँ होती, तो रोजाना डॉक्टर की फीस न देनी पड़ती?

ईश्वर सेवक-डॉक्टर का क्या काम था। ईश्वर की दया


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