लूँगा। आपको कष्ट करने की जरूरत नहीं। (स्त्री से) तुम तो चल रही हो?
मिसेज़ सेवक-मुझे नाहक ले चलते हो; मगर खैर, चलो।
भोजन के बाद चलना निश्चित हुआ। अंगरेजी प्रथा के अनुसार यहाँ दिन का भोजन एक बजे होता था। बीच का समय तैयारियों में कटा। मिसेज़ सेवक ने अपने आभूषण निकाले, जिनसे वृध्दावस्था ने भी उन्हें विरक्त नहीं किया था। अपना अच्छे-से-अच्छा गाउन और ब्लाउज निकाला। इतना शृंगार वह अपनी बरस-गाँठ के सिवा और किसी उत्सव में न करती थीं। उद्देश्य था सोफ़िया को जलाना,
लूँगा। आपको कष्ट करने की जरूरत नहीं। (स्त्री से) तुम तो चल रही हो?
मिसेज़ सेवक-मुझे नाहक ले चलते हो; मगर खैर, चलो।
भोजन के बाद चलना निश्चित हुआ। अंगरेजी प्रथा के अनुसार यहाँ दिन का भोजन एक बजे होता था। बीच का समय तैयारियों में कटा। मिसेज़ सेवक ने अपने आभूषण निकाले, जिनसे वृध्दावस्था ने भी उन्हें विरक्त नहीं किया था। अपना अच्छे-से-अच्छा गाउन और ब्लाउज निकाला। इतना शृंगार वह अपनी बरस-गाँठ के सिवा और किसी उत्सव में न करती थीं। उद्देश्य था सोफ़िया को जलाना,