रंगभूमि - Rangbhumi

जो इस कुदशा-निवारण के लिए उन्होंने सोच रखे थे। अंत में बोले-हमारी जाति का उध्दार कला-कौशल और उद्योग की उन्नति में है। इस सिगरेट के कारखाने से कम-से-कम एक हजार आदमियों के जीवन की समस्या हल हो जाएगी और खेती के सिर से उनका बोझ टल जाएगा। जितनी जमीन एक आदमी अच्छी तरह जोत-बो सकता है, उसमें घर-भर का लगा रहना व्यर्थ है। मेरा कारखाना ऐसे बेकारों को अपनी रोटी कमाने का अवसर देगा।

कुँवर साहब-लेकिन जिन खेतों में इस वक्त नाज बोया जाता है,


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जो इस कुदशा-निवारण के लिए उन्होंने सोच रखे थे। अंत में बोले-हमारी जाति का उध्दार कला-कौशल और उद्योग की उन्नति में है। इस सिगरेट के कारखाने से कम-से-कम एक हजार आदमियों के जीवन की समस्या हल हो जाएगी और खेती के सिर से उनका बोझ टल जाएगा। जितनी जमीन एक आदमी अच्छी तरह जोत-बो सकता है, उसमें घर-भर का लगा रहना व्यर्थ है। मेरा कारखाना ऐसे बेकारों को अपनी रोटी कमाने का अवसर देगा।

कुँवर साहब-लेकिन जिन खेतों में इस वक्त नाज बोया जाता है,


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