तो आवेगी। मेरे कहने से तो नहीं आई। बच्ची तो नहीं कि गोद में उठा लाती?
जॉन सेवक-पापा, वहाँ बहुत आराम से है। राजा और रानी, दोनों ही उसके साथ प्रेम करते हैं। सच पूछिए, तो रानी ही ने उसे नहीं छोड़ा।
ईश्वर सेवक-कुँवर साहब से कुछ काम की बातचीत भी हुई?
जॉन सेवक-जी हाँ, मुबारक हो। 50 हजार की गोटी हाथ लगी।
ईश्वर सेवक-शुक्र है, शुक्र है, ईसू, मुझ पर अपना साया कर। यह कहकर वह फिर आराम-कुर्सी पर बैठ गए।
अध्याय 4
चंचल प्रकृति
तो आवेगी। मेरे कहने से तो नहीं आई। बच्ची तो नहीं कि गोद में उठा लाती?
जॉन सेवक-पापा, वहाँ बहुत आराम से है। राजा और रानी, दोनों ही उसके साथ प्रेम करते हैं। सच पूछिए, तो रानी ही ने उसे नहीं छोड़ा।
ईश्वर सेवक-कुँवर साहब से कुछ काम की बातचीत भी हुई?
जॉन सेवक-जी हाँ, मुबारक हो। 50 हजार की गोटी हाथ लगी।
ईश्वर सेवक-शुक्र है, शुक्र है, ईसू, मुझ पर अपना साया कर। यह कहकर वह फिर आराम-कुर्सी पर बैठ गए।
अध्याय 4
चंचल प्रकृति