लड़के तालियाँ बजाकर चिढ़ाते हैं; पर ऑंखें बंद किए अपनी राह चले जाते हो। जानते हो न कि जिन लड़कों के माँ-बाप हैं, उन्हें मारेंगे, तो वे ऑंखें निकाल लेंगे। केले के लिए ठीकरा भी तेज होता है।
भैरों-दूसरे लड़कों की और उसकी बराबरी है? दरोगाजी की गालियाँ खाते हैं, तो क्या डोमड़ों की गालियाँ भी खाएँ? अभी तो दो ही तमाचे लगाए हैं, फिर चिढ़ाए, तो उठाकर पटक दूँगा, मरे या जिए।
सूरदास-(मिट्ठू का हाथ पकड़कर) मिठुआ, चिढ़ा तो, देखूँ यह क्या करते हैं। आज जो कुछ होना होगा,
लड़के तालियाँ बजाकर चिढ़ाते हैं; पर ऑंखें बंद किए अपनी राह चले जाते हो। जानते हो न कि जिन लड़कों के माँ-बाप हैं, उन्हें मारेंगे, तो वे ऑंखें निकाल लेंगे। केले के लिए ठीकरा भी तेज होता है।
भैरों-दूसरे लड़कों की और उसकी बराबरी है? दरोगाजी की गालियाँ खाते हैं, तो क्या डोमड़ों की गालियाँ भी खाएँ? अभी तो दो ही तमाचे लगाए हैं, फिर चिढ़ाए, तो उठाकर पटक दूँगा, मरे या जिए।
सूरदास-(मिट्ठू का हाथ पकड़कर) मिठुआ, चिढ़ा तो, देखूँ यह क्या करते हैं। आज जो कुछ होना होगा,