रंगभूमि - Rangbhumi

न गलेगी। यहाँ भी कुछ दम रखते हैं। बारहों मास खुले-खजाने जुआ खेलते हैं। एक दिन में हजारों के वारे-न्यारे हो जाते हैं। थानेदार से लेकर सुपरीडंट तक जानते हैं, पर मजाल क्या कि कोई दौड़ लेकर आए। खून तक छिपा डाले हैं।

ताहिर-तो आप ये सब बातें मुझसे क्यों कहते हैं, क्या मैं जानता नहीं हूँ? आपने सैयद रजा अली थानेदार का नाम तो सुना ही होगा, मैं उन्ही का लड़का हूँ। यहाँ कौन पंडा है, जिसे मैं नहीं जानता।

नायकराम-लीजिए, घर ही बैद,


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न गलेगी। यहाँ भी कुछ दम रखते हैं। बारहों मास खुले-खजाने जुआ खेलते हैं। एक दिन में हजारों के वारे-न्यारे हो जाते हैं। थानेदार से लेकर सुपरीडंट तक जानते हैं, पर मजाल क्या कि कोई दौड़ लेकर आए। खून तक छिपा डाले हैं।

ताहिर-तो आप ये सब बातें मुझसे क्यों कहते हैं, क्या मैं जानता नहीं हूँ? आपने सैयद रजा अली थानेदार का नाम तो सुना ही होगा, मैं उन्ही का लड़का हूँ। यहाँ कौन पंडा है, जिसे मैं नहीं जानता।

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